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कमज़ोर नहीं

Updated: Jun 3, 2019



अपने सपनों के सिरहाने पर सर रख

अपनी प्रतिभा की पलके झपकाती रही

मजबूर थी वो मज़बूत होकर भी शायद

हमारी तरह कमज़ोर नहीं


अपने ख्वाबों की मूरत बनाकर भी

गुलिस्तां की मुराद पूरी करती थी

अपनी उलफत से मुख्तलिफ ज़रूर है

हमारी तरह कमज़ोर नहीं


फितूर था उसका उड़ना

मेरे अक्स की वो पासबान थी

उसके हर्ष को शिकस्त करा जो तुमने

वो झरने की गूंज में अपनी जान बचाती रही

पंखों में उसने अपने जज़्बा जो तराशा है

यह हमारी तरह कमज़ोर नहीं


आज मैं लिखता हूं तो उसकी जुस्तजू में

डूबता भी हूं तो उसके सुकून में

नफ़रतों की मिट्टी को

अपनी हँसी की बरसात से दफनाती थी

सब ज़ुल्म सहकर भी ना जाने कैसे गुनगुनाती थी


जफा का शिकार बन अपना तख़्त सजाती है

औरत होकर भी हमें मर्द बनना सिखाती है

एक हीरे से भी ज़्यादा कठोर है वो

हमारी तरह कमज़ोर नहीं।...



- Raman Gera

https://www.instagram.com/dilsoz_magister/

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