लौट आया हूँ मैं !




Picture By Sanket Chandila



लौट आया हूँ फिर में वहाँ,

जहाँ मेरा बचपन बीता था !

तमाम उम्र छानकर ख़ाक,

गली-कूचों, क़स्बों,शबरों की!

हाँ, लौट आया हूँ फिर मैं !


भूला तो ना था मैं कुछ भी,

पर शायद फ़ुर्सत ना थी,

याद करने की उसे,

जिसे पीछे छोड़ आया था !

पर अब लौट आया हूँ मैं,

ख़ूब फ़ुर्सत के साथ !


मुझे सुध लेनी है,

उस टूटे पूराने घर की !

बुजुर्ग हो चले नीम के उस पेड़ की,

जिसकी झांव के तले,

बचपन की दोपहरें काटी थी !

हाँ लौट आया हूँ फिर मैं !


खेलना है बेट बॉल यारों के साथ,

फिर से गाँव के मैदान में !

नहाना है खेत के ट्यूबवेल पर !

खाने हैं शहतूत और निबोली !

क्योंकि अब मैं लौट आया,

ख़ूब फूर्सत के साथ !


जीने अपना बचपन और

सँवारने अपना गाँव,

लौट आया हूँ अब मैं,

फिर कभी शहर ना जाने के लिये ! ~ चंदीला