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मोहल्ले में आज एक सज्जन के घर


Photo by Sharon Christina Rørvik

मोहल्ले में आज एक सज्जन के घर,

लड़का हुआ है तीन लड़कियों के बाद।

इस अवसर पर जश्न होगा,

इसका निमंत्रण दे रहे हैं वो सबके घर।


लड़के के होने की ख़ुशी,

इनके चेहरे पर साफ है झलक रही।

तभी तो निमंत्रण के साथ,

हर घर में मिठाई है बंट रही।


ये सब देख मेरे मन में

एक सवाल था कौंध रहा।

लड़के होने पर तुम,

इतना खुश हो की मोहल्ले में

तुमने मिठाइयाँ बाँट दी।

जब लड़की हुई थी तुम्हारे घर,

तुम बस घर पर मिठाइयाँ लाये थे।


तुम्हारी सोच अब भी वही पुरानी है कि ,

लड़कियों के काम घर तक ही सिमित हैं।

तुम अब भी वही मानते हो कि,

चूल्हा-चौका, रसोईघर तक ही ये सीमित हैं।


जब लड़कियां अच्छा कर रही हैं लड़कों से,

तो तुम इनको क्यों घर में हो दबा रहे।

जब दोनों हैं बराबर कोई नहीं है कम,

तो फिर तुम क्यों हो इनको कम है नाप रहे।


छोड़ दो इनको आज़ाद,

ये कई मिसालें पेश करेंगी।

उड़ेंगी जब ये पंख फैलाये,

जा के गगन को चुम लेंगी।


आओ मिलकर आगे बढ़ायें,

छोड़ दें इनको आज़ाद हम।

जब हो इनको कठिनाई,

सदा खड़े रहे इनके साथ हम।



-Written by Suraj Kumar

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